

Farrukhsiyar Badshah
Farrukhsiyar Badshah: एक व्यापारी जो मुग़ल शहजादे फर्रुखसियर की शहंशाह का तख़्त पाने में आर्थिक रूप से मदद करता है और ख़िताब पाता ‘जगत सेठ’ का जिसका अंग्रेजी तर्जुमा है ‘banker of the world’. ये व्यापारी था बंगाल रियासत का रहने वाला मानिकचन्द. मानिकचंद के पूर्वज राजस्थान के नागौर जिले के रहने वाले जैन व्यापारी थे जो बाद में पहले बिहार और फिर बंगाल की रियासत में आकर बसे. साल 1713 में जब मुग़ल शहजादों के बीच तख़्त-ओ-ताज के लिए खींचतान मची हुई थी तब व्यापारी मानिकचंद फर्रुख्सियर की तख़्त पाने में लगने वाली आर्थिक जरूरतों को पूरा करता है
जिसे Farrukhsiyar Badshah बन जाने पर रिटर्न गिफ्ट के तौर पर जगत सेठ की उपाधि देता है. जगत सेठ की उपाधि सिर्फ मानिकचंद तक ही सीमित नही थी यह उपाधि मानिकचंद के मौजूदा और आने वाली पीढ़ियों तक को मिली हुई थी. जगत सेठ होने के प्रभाव को हम इस तरह समझ सकते हैं कि पूरी बंगाल रियासत के लिए सिक्के जारी करने का एकाधिकार जगत सेठ के पास हुआ करता था…
इस पोस्ट में
जगत सेठ को ईस्ट इंडिया कंपनी के आधिकारिक इतिहासकार Roben Orme उस समय का सबसे बड़ा बैंकर और मनी चेंजर बताते हैं. वहीँ इतिहासकार ग़ुलाम हुसैन खान मानते हैं कि उनका धन इतना था कि किसी अतिश्योक्ति पूर्ण कहानी सा लगता था, इतिहासकार अनुमान लगातें हैं 1750s में जगत सेठ की कुल पूँजी 14 करोड़ थी जिसे आज 2022 में 6% महंगाई दर से अडजस्ट करें कुछ 44 लाख करोड़ के आसपास ये आंकड़ा आता है जो एलन मस्क या जेफ्फ बेजोस की कुल संपत्ति से कहीं ज्यादा है.
जगत सेठ का प्रभाव इतना था कि बंगाल के नवाब जैसे मुर्शिद कुली खान दिल्ली में मुग़ल बादशाह को लगान देने के लिए जगत सेठ का ही व्यापारिक नेटवर्क इस्तेमाल करते थे, इतिहासकार मानते हैं वे(जगत सेठ ) बंगाल में जिसे चाहते उठा या गिरा सकते थे चाहे वो नवाब ही क्यूँ ना हो, उनकी आर्थिक के साथ साथ राजनितिक पर भी तगड़ी पकड़ थी. उदहारण के लिए बंगाल में सेना द्वारा तख्तापलट कर अलीवर्दी खान को नवाब बनाया जाना जगत सेठ के प्रयोजन से संभव हुआ था
और फिर जब सिराजुद्दौला बंगाल का नवाब बना तो उसने जगत सेठ से तीस लाख रूपए नजराने के तौर पर माँगा जिसे जगत सेठ द्वारा मना कर दिए जाने पर जवाबी कार्यवाही में सिराजुद्दौला ने उनपर काफी प्रतिबन्ध लगाए जिसके परिणाम स्वरुप जगत सेठ परिवार ने खिलाफ रोबर्ट क्लाइव के साथ मिलकर सिराजुद्दौला के खिलाफ षड्यंत्र किया जो प्लासी के युद्ध में दिखा,
मुस्लिम महिलाओं के साथ बदसलूकी करने को बोलने वाले बाबा के ऊपर जब FIR हुवा तो..
Farrukhsiyar Badshah ईस्ट इंडिया कंपनी के सबसे बड़े क़र्ज़ दाताओं में एक जागत सेठ घराने का पतन प्लासी के युद्ध के बाद मीर जफ़र के नवाब बनने पर शुरू हुआ जब मीर ज़फर ने महताब चन्द और उनके भतीजे स्वरुप चन्द सहित जगत सेठ घराने के कई सदस्यों को मरवा कर उनके शवों को मुंगेर किले के बाहर फेंकवा दिया और महताब चन्द के बेटे कुशल चन्द को जगत सेठ बना दिया पर सिक्के जरी करने के अधिकार को कलकत्ता में अंग्रेजों को दे दिया जिसके बाद मुर्शिदाबाद में प्राइवेट बैंकर्स की मांग ख़त्म सी हो गयी.
Farrukhsiyar Badshah जिस वक्त कुशल चन्द को जगत सेठ बनाया गया उस वक्त उसकी उम्र मात्र अट्ठारह वर्ष थी जिसके पास अपने पिटा के अनुभव की कमी थी जिससे जगत सेठ घराना पतन की राह पर चलता चला गया.
मुर्शिदाबाद में आज भी जगत सेठ की हवेली देखि जा सकती है जो अब संग्रहालय में तब्दील कर दी गयी है…..
प्लासी के युद्ध के साथ साथ और भी ऐतिहासिक किस्से फिर कभी किसी और ब्लॉग में तब तक पढ़ते रहिए भारत एक नयी सोच…