Cheteshwar Pujara: क्या इस जुझारु खिलाड़ी का करियर खत्म हो चुका है?

Published by
Cheteshwar Pujara

टीम इंडिया की “दीवार” माने जाने वाले सौराष्ट्र के बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा का करियर

Cheteshwar Pujara: अब ढलान पर है।लंबे समय तक टीम की रीढ़ रहे 34 वर्षीय पुजारा की बढ़ती उम्र,धीमा रन रेट और अनियमित फार्म ने उनकी राह और कठिन कर दी है।वनडे और T20 के लिहाज से तो वह पहले ही “अनफिट”थे।एक टेस्ट टीम ही ऐसी थी जिससे उनके करियर की गाड़ी खिंच रही थी।जिस देश मे आईपीएल जैसी विश्वस्तरीय T-20 लीग आयोजित होती हो और कमोबेश आईपीएल का प्रदर्शन ही खिलाड़ियों के लिए टीम इंडिया के रास्ते खोलता हो वहां पुजारा का धीमा रन रेट एक बड़ी वजह बनेगा ही।पुजारा समय के साथ स्वयं की बल्लेबाजी शैली में बदलाव नहीं ला सके।

पुजारा की जगह विहारी को आजमाना इस बात के संकेत हैं “कप्तान रोहित”

Cheteshwar Pujara जब तक विराट कोहली टेस्ट कप्तान रहे पुजारा का करियर तमाम आलोचनाओं के बाद भी चलता रहा किंतु विराट की कप्तानी जाते ही पुजारा के सितारे भी अब गर्दिश में जाते प्रतीत हो रहे हैं।नए कप्तान रोहित शर्मा ने अभी हाल ही में श्रीलंका के खिलाफ मोहाली में खेले गए टेस्ट मैच में आन्ध्र प्रदेश के युवा बल्लेबाज हनुमा विहारी को नम्बर-3 पर भेजा।पुजारा लंबे समय तक इसी नम्बर पर खेलते आ रहे हैं। और टीम प्रबंधन अब भविष्य की ओर देख रहे हैं।जाहिर है उम्रदराज  पुजारा अब नम्बर 3 के लिए पहली पसंद नहीं रहे।इसके जिम्मेदार भी स्वयं पुजारा हैं।

समय के साथ चलते हुए आपको स्वयं में बदलाव लाना होता है।पुजारा को चाहिए था कि अपनी बेहद धीमी बल्लेबाजी में सुधार लाते किंतु वह ऐसा कर नहीं सके।भले ही टेस्ट मैच है किंतु इसका यह मतलब तो नहीं कि स्ट्राइक रोटेट ही न की जाए और डॉट बॉल्स ही खेलते रहा जाए।

 Cheteshwar Pujara फटाफट क्रिकेट के आने से अब क्रिकेट खेलने और देखने का नजरिया बदल चुका है।जाहिर है इस बदलाव से टेस्ट क्रिकेट भी अब अछूता नहीं है। अब कप्तान,कोच और टीम प्रबंधन दिन के हिसाब से नहीं बल्कि सेशन के हिसाब से खेलते हैं।और इसके लिए ओवर्स मायने रखते हैं।भूतपूर्व कप्तान कोहली के अनुसार,”टेस्ट की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि आप मैच के कितने सेशन्स में विरोधी टीम पर हावी रहे।”

दाएं हाथ के बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा ने न जाने कितनी ही बार टीम इंडिया को

Cheteshwar Pujara इसमें कोई संदेह नहीं कि दाएं हाथ के बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा ने न जाने कितनी ही बार टीम इंडिया को निश्चित दिख रही हार से बचाया है।न सिर्फ घरेलू धीमी/टर्न लेती पिचों में बल्कि चुनौती पूर्ण SENA देशों(साउथ अफ्रीका, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड,ऑस्ट्रेलिया) की उछाल/स्विंग लेती पिचों पर भी वह खूंटा गाड़ बल्लेबाजी कर जिम्मेदारी पूर्वक एक छोर सम्भालते रहे ।अभी पिछले ही वर्ष ऑस्ट्रेलिया दौरे में उन्होंने न सिर्फ एक छोर सम्भाला बल्कि शरीर पर गेंदे खायीं,चोटिल हुए लेकिन टीम को मुश्किल से निकालकर ही ड्रेसिंग रूम लौटे।

देखिये कैसे अवैध वसूली कर रहा DDU, छात्रों ने लगाए कुलपति पर आरोप

फिलिस्तीन में भारतीय राजदूत मुकुल आर्य की मौत, एस जयशंकर ने कहा- मुझे गहरा सदमा लगा

कितनी ही उनकी यादगार पारियां उनके जुझारूपन से ओतप्रोत रिकार्ड बुक में हमें दिख जाएंगी।किंतु समय बदलाव का सूचक है।जो रक्षात्मक रवैया उनकी खूबी,उनकी पहचान हुआ करता था वही उनके लिए मुसीबत बन गया।

अब चाहकर भी वह इससे दूर नहीं जा पा रहे।धीमे बल्लेबाज का जो ठप्पा उनपर लग चुका है उससे अब वह शायद ही निकल पाएं। विहारी को उनकी जगह मौका दिया जाना इस बात का संकेत है कि पुजारा

Cheteshwar Pujara
Barkat

Wanna success...

Recent Posts