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14 घंटे चली Manish Sisodia के घर पर CBI की रेड, डिप्टी CM का फोन और लैपटॉप जब्त और FIR भी दर्ज

Manish Sisodia

CBI की रेड सिसोदिया के घर 14 घंटे चली

  • सिसोदिया बोले- केंद्र कर रही CBI का इस्तेमाल
  • CBI ने सिसोदिया का ईमेल डेटा भी जब्त किया
  • रेड के बाद पूछताछ के लिए भी बुला सकती है CBI

Manish Sisodia: शराब घोटाले में फंस चुके डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया के घर से 14 घंटे बाद CBI की टीम बाहर निकली. सुबह के समय जो रेड शुरू हुई थी, वो काफी देर रात तक चलती रही और अब जाकर खत्म हुई है. जांच के दौरान ही कुछ सीक्रेट डॉक्यूमेंट भी बरामद किए गए हैं.

इस पूरे मामले में सीबीआई की FIR ने मनीष सिसोदिया की मुश्किलें सबसे ज्यादा बढ़ाई है. इस मामले में सियोदिया को सिर्फ एक आरोपी नहीं माना जा रहा है, बल्कि इसमें मुख्य आरोपी के तौर पेश किया जा रहा है. सीबीआई की FIR में Manish Sisodia का नाम ही सबसे ऊपर भी है, कुछ बाकी आरोपियों के नाम नीचे आ रहे हैं. इस पूरे मामले में जांच का केंद्र मनीष सिसोदिया पर ही रहने वाला है. वैसे डिप्टी सीएम के सामने बड़ी चुनौती यह भी है कि जो उनके करीबी लोग हैं, उन पर कमीशन लेकर शराब व्यापारियों को लाइसेंस देने का भी आरोप अब लग गया है. CBI को इसके भी कुछ पुख्ता सबूत हाथ लगे हैं.

Manish Sisodia

इस पूरे विवाद पर Manish Sisodia ने क्या कहा?

CBI के इस एक्शन से Manish Sisodia काफी ज्यादा खफा है. देर रात को मीडिया से बात करते हुए उन्होंने सीधे-सीधे ही केंद्र सरकार पर अपना हमला बोला है. सिसोदिया ने बोला है कि आज सुबह सीबीआई की टीम उनके घर आई थी, उन्होंने पूरे घर की तलाशी भी ली है. मेरा कंप्यूटर और मेरा पर्सनल मोबाइल सीज करके ले गए हैं. मैंने और मेरी फैमिली ने जांच में पूरा सहयोग दिया, और अगर आगे भी जांच होगी तो सहयोग देंगे. हमने कुछ भी गलत नहीं किया है, किसी तरह का कोई भ्रष्टाचार नहीं किया है.

इसलिए हम बिल्कुल डर नहीं रहे हैं. हम जानते हैं कि सीबीआई का गलत उपयोग किया जा रहा है, सीबीआई को कंट्रोल करके ऊपर से यूज किया जा रहा है, उन्हें ऊपर से कंट्रोल किया जा रहा है. सभी लोग जानते हैं कि किस तरह सीबीआई को कंट्रोल करके दिल्ली सरकार के अच्छे काम रोकने की भी कोशिश की जा रही है.

वे आगे बताते हैं कि हम कट्टर ईमानदार भी हैं, पिछले 7-8 वर्षों से जब से राजनीति में आए हैं, ईमानदारी की ही राजनीति करते हैं, हमने कहीं कुछ भी गलत नहीं किया और आगे भी ऐसे ही काम हम करते रहेंगे. हमने बहुत ईमानदारी से दिल्ली में स्कूल बनाए हैं, लाखों बच्चों का भविष्य भी संवारा है, अपनी ईमानदारी से काम करते हुए अस्पताल बनवाए हैं, जिस से लाखों लोगों को इलाज मिला है. लाखों लोगों की दुआएं भी, लाखे बच्चों और उनके पेरेंट्स की दुआएं हैं.

हम आगे भी उनके लिए काम करते रहेंगे. केंद्र सरकार जितना भी दुरुपयोग करना चाहे सीबीआई का वो कर ले, हमने कुछ भी गलत नहीं किया, वे हमारा कुछ भी नहीं बिगाड़ सकते. ये लोग लाख रोकने की कोशिश करें, मगर स्कूल का काम लोगों को अच्छी शिक्षा देने का काम और अच्छा इलाज देने का काम दिल्ली सरकार कभी रोकेगी नहीं.

CBI की FIR से क्या पता चलता है?

Manish Sisodia

वैसे जिस सीबीआई कॉपी की वजह से ये मामला और ज्यादा मजबूत बना है, उसमें कुछ लोगों का भी जिक्र किया गया है. ये सभी Manish Sisodia के करीबी ही हैं. FIR की कॉपी से पता चलता है कि दिनेश अरोड़ा, अमित अरोड़ा, और अरुण पांडे शराब व्यापारियों से काफी कमीशन लिया करते थे. इन्हे कमीशन के बदले में ही लाइसेंस दिया जाता था. अब ये चारों लोग ही मनीष सिसोदिया के करीबी भी बताए गए हैं, इसी वजह से CBI को उनकी भूमिका को लेकर संदेह किया है.

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पुरानी नीति और नई नीति में क्या है फर्क ?

अब इस शराब घोटाले के विवादित बिंदू को अगर थोड़ा सरल भाषा में समझना हो तो सबसे पहले पुरानी नीति को समझना आवश्यक हो जाता है. पहले शराब बिक्री के व्यापार में दिल्ली सरकार पूरी तरह से शामिल थी. दिल्ली में सरकार की अपनी Liquor Shops भी होती थीं, जिनको Excise Department द्वारा नियंत्रित भी किया जाता था.  मगर नई पॉलिसी के तहत इस पूरे ढांचे को ही खत्म कर दिया गया. दिल्ली सरकार ने अब यह तय किया कि वो इस बिज़नेस का हिस्सा नहीं रहेगी और Private Players ही दिल्ली में शराब की बिक्री भी करेंगे.

इसके तहत दिल्ली को पूरे 32 ज़ोन में बांटा गया और हर ज़ोन में ही 27 Private Vendors को शराब की बिक्री का लाइसेंस भी दे दिया गया. यानी इस नीति के द्वारा दिल्ली के हर वॉर्ड में 2 से 3 Liquor Vendors हो गए. इसके अलावा भी आरोप है कि मनीष सिसोदिया के विभाग द्वारा इन Private Vendors को काफी ज्यादा भारी डिस्काउंट पर शराब बेचने की छूट दी गई.

Manish Sisodia

Manish Sisodia पर लगे दो बड़े आरोप क्या हैं?

अब इस पूरे मामले में Manish Sisodia पर दो तरह के प्रमुख आरोप हैं. पहला आरोप यह है कि जब Excise Department ने Liquor Shops के लिए लाइसेंस जारी किए तो इस दौरान मनीष सिसोदिया के द्वारा कुल Private Vendors को 144 करोड़ 36 लाख रुपये तक का फायदा पहुंचाया गया. क्योंकि इस दौरान ही इतने रुपये की License Fee भी माफ कर दी.

जिससे सरकार को भी काफी भारी नुकसान हुआ. इसके अलावा भी मनीष सिसोदिया पर आरोप यह भी है कि उन्होंने कैबिनेट को अपने भरोसे में लिए बिना और उप-राज्यपाल के बिना ही फाइनल अप्रूवल के भी कई बड़े फैसले ले लिए.

CHANDRA PRAKASH YADAV

Why So Serious??

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