

कांग्रेसी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने पिछले करीब दो दिनों के पहले ही अपनी किताब ‘सनराइज ओवर अयोध्या: नेशनहुड इन ऑवर टाइम्स’ को लाॅंच किया है। लाॅन्चिंग के कुछ घंटों में ही लोगों ने सलमान खुर्शीद की इस किताब का विरोध करने लगा। बीजेपी नेताओं के अनुसार किताब के एक चेप्टर में कुछ ऐसा लिखा है कि जो देश में विभाजन की स्थिति बनाता है और हिंदू धर्म पर प्रहार करता है। खुर्शीद की इस किताब के जिस अध्याय में इसका जिक्र है उसको सैफ्रान स्काई नाम दिया गया है और ये विवादास्पद किताब का पेज नंबर 113 है। लेकिन अपनी किताब लेकर चल रहे देशव्यापी विरोध के बाद भी सलमान खुर्शीद जरा सी विचलित नहीं हुए हैं। उन्होंने ‘सनराइज ओवर अयोध्या” का विरोध कर रही बीजेपी और अन्य हिन्दूवादी संगठनों पर तंज कसते हुए कहा कि उन्हें अफसोस है कि यह किताब उन्होंने अंग्रेजी भाषा में लिखी है। सलमान ने आगे कहा कि बेचारे विरोध करने वालों का अंग्रेजी से कोई नाता नहीं या फिर उन्की अंग्रेजी इस हद तक कमजोर है कि उन्हें असली बात समझ में ही नहीं आ रही ।
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इन दिनों संभल के एंचोड़ा कंबोह में चल रहे पांच दिवसीय कल्कि महोत्सव के समापन में पहुंचे सलमान खुर्शीद ने इस विवाद और अपने लेखन के अर्थ पर सफाई देते हुए हिन्दू धर्म की जमकर तारीफ की थी। सलमान ने कहा कि अगर मेरे मन में हिंदू धर्म को लेकर कोई विष भरा होता तो मैं कतई इस कल्कि महोत्सव का हिस्सा नहीं होता। मैं यहां हर साल ही इस महोत्सव में आता हूं क्योंकि कि मेरी नजर में हिंदू धर्म एक व्यापक और हमारे मन को असीम शांति देने वाला, विश्व शांति की फैलाने वाला धर्म है। मुझे हिंदु धर्म में एक अतुट श्रद्धा है। मगर यह एक बात से तो इन्कार नहीं है कि हिंदू धर्म के कुछ दुश्मन बीच में घुस गए हैं जो पवित्र हिंदू धर्म को प्रदूषित करने का काम बखूबी कर रहे हैं। अपनी गंदी राजनीति के लिए पवित्र हिंदू धर्म का नाम गलत तरीके से इस्तेमाल कर रहे हैं। यह बात सरासर ग़लत है और ऐसे ही लोग हिंदू धर्म के शुभचिंतक नहीं हैं। उन सभी के मन में यह डर बैठ गया है कि कहीं इस किताब से उनका छलावा सबके सामने न आ जाए। यही सबसे बड़ी वजह है कि वह। सभी किताब पर प्रतिबंध लगवाना चाहते हैं लेकिन यह नामुमकिन है क्योंकि सच पर कोई भी प्रतिबंध या ताले नहीं लगा सकता है। सच्चाई हमेशा सामने आकर रहती है।
अपनी किताब के विवादित हिस्से पर सलमान खुर्शीद ने कहा कि मैंने यह लिखा है कि, ISIS और बोको हराम इस्लाम धर्म का गलत इस्तेमाल करते हैं लेकिन मुझसे किसी भी इस्लाम धर्म के मानने वाले ने तो कोई भी आपत्ति नहीं जतलाई। मैंने यह लिखा है कि उन जैसे धर्म का गलत इस्तेमाल करने वाला यदि किसी और धर्म में भी मौजूद है तो वह भी वही कर रहा है जो ISIS और बोको हराम करते हैं। किताब में मैंने अपनी बात समानता पर कही है न कि दोनों की तुलना कर दी है। लेकिन बड़ा ही अफसोस है कि किताब अंग्रेजी में लिखी हुई है और कुछ लोगों की अंग्रेजी इतनी कमजोर है कि उन्हें यह पुस्तक समझ ही नहीं आई। अगर ऐसा है तो फिर उन्हें इस पुस्तकका अनुवाद जरूर ही करा लेना चाहिए।
कोंग्रेसी नेता