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NCRB: भारत में बढ़ी दिहाड़ी मजदूरों की आत्महत्या दर, सुसाइड करने वाला हर चौथा इंसान दिहाड़ी मजदूर

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NCRB: नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) ने भारत में साल 2021 के आंकड़े पेश किए हैं। NCRB की इस रिपोर्ट में 2021 में आत्महत्या करने वाले लोगों का आंकड़ा पेश किया गया है । रिपोर्ट के मुताबिक साल 2021 में भारत मे कुल 1 लाख 64 हजार 33 लोगों ने आत्महत्या की है । वहीं सबसे अधिक चौंकाने वाली बात ये रही कि आत्महत्या करने वाले इन 1 लाख 64 हजार 33 लोगों में सबसे अधिक दिहाड़ी मजदूर थे । नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार साल 2021 में कुल 42004 दिहाड़ी मजदूरों ने आत्महत्या की । रिपोर्ट के अनुसार साल 2021 में आत्महत्या करने वालों में हर चौथा इंसान दिहाड़ी मजदूर था ।

बता दें कि आत्महत्या करने वाले इन 42004 दिहाड़ी मजदूरों में 4246 महिलाएं भी शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार जिन 42004 दिहाड़ी मजदूरों ने आत्महत्या की है उनमें सबसे अधिक 7673 लोग तमिलनाडु से हैं वहीं महाराष्ट्र से 5270 जबकि मध्यप्रदेश से 4657 दिहाड़ी मजदूर शामिल हैं । इसके अलावा जिन राज्यों के सबसे अधिक दिहाड़ी मजदूरों ने आत्महत्या की उनमें तमिलनाडु, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश के अलावा तेलंगाना के 4223, केरल से 3345 और गुजरात से 3206 लोग शामिल हैं । बता दें कि साल 2020 के NCRB के आंकड़ों में भी भारत मे सुसाइड करने वाले सबसे अधिक लोगों में से दिहाड़ी मजदूर ही थे ।

दिहाड़ी मजदूरों की सुसाइड के साल दर साल बढ़ रहे आंकड़े

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भारत मे दिहाड़ी मजदूरों की आत्महत्या करने की दर लगातार बढ़ रही है । जहां 2021 में 42004 दिहाड़ी मजदूरों ने आत्महत्या की है वहीं साल 2020 में यह संख्या 37666 थी । पिछले वर्ष से तुलना करें तो इस साल दिहाड़ी मजदूरों की आत्महत्या में करीब 11 % की बढ़ोतरी हुई है जो काफी चिंताजनक है । बता दें कि साल 2019 में 32563 दिहाड़ी मजदूरों ने आत्महत्या की थी तो वहीं 2020 में यह आंकड़ा 37666 हो गया जबकि 2021 के नवीनतम आंकड़ों में दिहाड़ी मजदूरों के आत्महत्या के मामले बढ़कर 42004 हो गए हैं ।

अन्य वर्गों के सुसाइड मामले भी बढ़े

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NCRB ने किसी भी श्रेणी में न आने वाले लोगों को ‘अन्य लोग” माना है । साल 2021 में इस श्रेणी में 23547 लोगों ने आत्महत्या की है । वहीं साल 2021 के आंकड़ों में वेतनभोगी या प्रोफेशनल लोगों की आत्महत्या की संख्या 15870 है । वहीं आत्महत्या करने वालों में छात्रों की संख्या 13089 है । बता दें कि दिहाड़ी मजदूर के बाद इस साल जिस वर्ग ने सबसे अधिक आत्महत्या की है वह हाउसवाइफ या गृहिणी हैं । आंकड़ों के मुताबिक इस साल 23179 गृहणियों ने आत्महत्या की है । अगर इस साल कुल आत्महत्या करने वालों में हाउसवाइफ का प्रतिशत देखें तो दिहाड़ी मजदूर के बाद यह सबसे अधिक 14.1 % है ।

सुसाइड करने वालों में बड़ी संख्या ‘सेल्फ एम्प्लॉयड’ की

NCRB की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2021 में आत्महत्या करने वालों में एक बड़ा वर्ग ऐसे लोगों का भी था जिनका खुद का रोजगार था । साल 2021 में 20231 सेल्फ एम्प्लॉयड लोगों ने खुद को मार डाला । बता दें कि यह संख्या साल 2021 की कुल आत्महत्याओं का 12.3 % है । जिन 20231 सेल्फ एम्प्लॉयड लोगों ने सुसाइड की उनमे से 12055 का खुद का बिजनेस था जबकि 8176 लोग अन्य स्वरोजगार से जुड़े थे । बता दें कि पिछले साल यानी साल 2020 में 17332 सेल्फ एम्प्लॉयड लोगों ने आत्महत्या की थी । वहीं इस साल करीब 17 % की बढ़ोतरी हुई है ।

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आत्महत्या करने वाले बेरोजगारों की घटी है संख्या

एनसीआरबी की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार जिस एक वर्ग की आत्महत्या दर में कमी आई है वह है बेरोजगारों की । बता दें कि साल 2021 में 13714 बेरोजगार लोगों ने आत्महत्या की है । वहीं साल 2020 में यह आंकड़ा 15652 था । आंकड़ों के मुताबिक इस साल बेरोजगारों की आत्महत्या दर में करीब 12 % की कमी आई है ।

सुसाइड के साल दर साल बढ़ रहे मामले

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एनसीआरबी के आंकड़ों की मानें तो भारत मे आत्महत्या के मामले हर साल बढ़ते जा रहे हैं । यदि NCRB द्वारा प्रोवाइड कराए गए डेटा के पिछले 5 साल के आंकड़े देखें तो जहां साल 2017 में 129887 लोगों ने आत्महत्या की थी वहीं आत्महत्या दर 9.9 % थी । वहीं साल 2018 में आत्महत्या के 134516 मामले सामने आए जिससे यह दर बढ़कर 10.2 पहुंच गई । साल 2019 में कुल 139123 लोगों ने सुसाइड किया तो वहीं साल 2020 में यह आंकड़ा बढ़कर 153052 हो गया । वहीं NCRB के साल 2021 के आंकड़ों में यह संख्या 1 लाख 64 हजार 33 हो गयी ।

यदि पिछले 5 सालों से देश मे आत्महत्या की घटनाएं देखें तो पता चलता है कि साल दर साल इसमें इजाफा हो रहा है । बता दें कि संयुक्त राष्ट्र का लक्ष्य है कि साल 2030 तक दुनिया भर में हो रही आत्महत्याओं को एक तिहाई तक कम किया जाए लेकिन भारत मे यदि पिछले 5 सालों का आंकड़ा देखें तो यह संख्या घटने की बजाय बढ़ ही रही है । भारत मे साल 2020 के मुकाबले इस साल आत्महत्या करने वालों की संख्या करीब 10 % बढ़ी है ।

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